Thursday, June 10, 2010

मेघ गीत मेघ बरसो रे

मेघ गीत    मेघ बरसो रे

मेघ बरसो रे
प्यासे  देश,
बहां सब रीत गये ।
ताल तलैया ,नदियाँ सूखी
रीता हिया का नेह 
मेघ बरसो रे पिया के देश ...
बहाँ सब बीत गये ।

कुम्लाऍ है
कमल   कुमुदनी
घास पात  और देह
उड़ उड़ टेर लगाये  पपीहा
होते गये विदेह ।
मेघ हर्षो रे
प्यासे देश
यहाँ सब रीत गये ।
मेघ बरसो रे
पिया के देश
बहाँ सब रीत गये ।

    कमलेश कुमार दीवान
 दिनाँक २३अगस्त २००९

5 comments:

  1. बहुत सुन्दर!!

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  2. सादगी से भरपूर..

    सुन्दर..

    कुंवर जी,

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  3. बहुत सुन्दर रचना है।बधाई।

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  4. उड़ उड़ टेर लगाये पपीहा
    होते गये विदेह ।
    मेघ हर्षो रे
    प्यासे देश
    यहाँ सब रीत गये ।

    बहुत सुन्दर!

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