Saturday, April 16, 2011

अखबारो मे


अखबारो मे

अखबारो मे आम हुये है
खास खास चरचे
खास खास चरचे ।

दीवारो पर लिखे इबारत
अबकी बारी इनकी हैं
ढोल मढ़ैया ,चौसर चंका
सारी बाजी इनकी है
हरकारो के दाम हुये है
सड़को पर पर्चे ।
खास खास चरचे ।

कीमत बढ़ी आसमानो सी
सुलतानो के होश उड़े
दरबारी को नींद न आई
रहे ऊँघते खड़े खड़े
लोकतंत्र मे आई खराबी
फिर जनता पर दोष मढ़े
द्वार द्वार बदनाम  हुये है
दौलत और खर्चे ।
खास  खास चरचे ।

अखबारो मे आम हुये है
खास खास चरचे
खास खास चरचे ।

कमलेश कुमार दीवान
दिनाँक २७ । १०। १९९८

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