Friday, May 24, 2013

एक अकेला हंस


एक अकेला हंस

एक अकेला हंस
युगो से
सैर कराता रहा काग को
पर कौऔ ने
 डींग हाँकना
जारी रख्खा है ।

रोज बताते
नये तरीके
ऐसे हम उडान भरते है
कभी पँख फैला देते है
और सिमट गोता भरते हैं

जब बारी आती उडान की
पीठ हँस की बैठ लिये है
करते मानसरोवर यात्रा
क्रम अब भी
जारी रख्खा है ।
एक अकेला हंस...

कमलेश कुमार दीवान
२२।०५।१३