Tuesday, March 31, 2015

दुनियाँ के युवाओ प्रतिकार करना सीखो....

दुनियाँ के युवाओ प्रतिकार करना सीखो
१..यह दुनियां उतावले लोगो के लिये नये संसार रचने के लिये भी समर्थ तो है किन्तु धैर्य को अपने अंतस मे समाहित रखने बाले लोग विजयी होते है ।अपने अंदर प्रतिकार की शक्ति को जागृत रखे और धीरे धीरे चलते रहें।
प्राईवेट सेक्टर मे भी कार्य से आपकी ग्रेडिग नही हो रही है वहाँ एक नये तोर तरीको का वासिज्म है ।निजी कम्पनियो मे बेहतर  काम करने वाले अनेक लोग उनसे कम जानकारो से मात खा जाते है।दुखी होने की आवश्यकता नही है ।आपको यह करना है कि अधिकारी व्दारा माँगे जाने पर ही सुझाव दे और कार्य के लिये अपने अधिकारी  को बेहतर आईडिया देते समय यह ध्यान रखा जावे कि क्या वह स्वीकार करेगे ?याद रखे आपके सुझाव पर काम करने वाले लोगो को विदेश भेजा जाता है ,आप जहाँ के तहा बने रहते हो । युवाओ को संगठित होकर अपने विरूध्द चल रहे पेशेवर षड़यँत्रो के खिलाफ आवाज उठाना ही होगा । २९मार्च २०१५

३..३०मार्च २०१५
मेरे बच्चो खतरे कही दूर से नहीं आते वह हमारे आसपास ही मँडराते है ,उनसे बचकर अपनी प्रगति करना ही कामयावी है

मै समझता हूँ कि इतनी समझ उम्र के साथ हर एक मै आ जानी चाहिये ।

Saturday, March 21, 2015

बच्चे ......थक चुके है बच्चे


हमारे देश मे प्राथमिक से हायर सेकेन्ड्री तक सामान्य शिक्षा से लेकर विशेष विषयो के पाठ्यक्रम तक बच्चो की तरफ खिसकाने की कोशिश निरन्तर होती रहती है नैतिक शिक्षा , किशोर शिक्षा , पर्यावरण शिक्षा ,आपदा प्रबँधन तब कभी अध्यामिक शिक्षा, कृषि एवम् कानून की पढ़ाई भी तो लोकताँत्रिक एवम् कृषिप्रधान देश के लिये जरूरी है ।
शिक्षा के बारे मे  बच्चो पर सर्वाधिक बोझ परिवार की अपेक्षाओं का भी है ,जिसे कविता के माध्यम से रेखाँकित करने का प्रयास किया है कृपया देखें.
बच्चे
थक चुके है बच्चे
पढ़ते पढ़ते अनार आम
A B C D
अलिफ वे
पक चुके है शिक्षक
पढ़ाते पढ़ाते
अनार आम A B C D अलिफ वे ।
नही थके है निर्देश दाता
बच्चो को ये पढ़ाये
बच्चो को येसे पढ़ाये
हाथ धुलवाये
बच्चे भूखें है
उन्हे खाना खिलाये ,पानी पिलाये
बच्चे थक रहे हैं
आगामी दिनो मे
शौच कराने
पैर दवाने आदि आदि के
 निर्दैश भी  आयेगे
खाना खिलाने ,पानी भरने, पिलाने
बर्तन माँजकर उन्हे सहेजकर रखने
सब कुछ दूसरे दिन के लिये तैयार करने
रपट तैयार कर भेजने
कितना बढ़ गया है काम का बोझ
बच्चो पर किताबो के बोझ कि चर्चा
शिक्षको की लदान पर कोई बहस मुबाहिसे न हो
तब स्कुल कैसे चलेगें ।
कमलेश कुमार दीवान
07मार्च 2014

Tuesday, March 17, 2015

बादर मत बरसो


मौसम खराब है बर्फवारी ओले और बरसात का आलम मार्च माह मे बरसात जैसा है फसले तबाह हो गयी है आवाम अपने भविष्य को लेकर चिंतित है बादलो के लिये यह  अनुरोध गीत भेज रहा हूँ प्रार्थना करे की पृ्थ्वी पर जीवन की सृष्टि आसान बनाये ,सादर समर्पित है ।

बादर मत बरसो

बादर मत बरसो
दिन रेन
बादर मत बरसो
दिन रेन ।
जिन अखियों मे
नीर न आये
उन्ही बसत है चैन
बादर मत बरसो
दिन रेन ।
ऊँचे पर्वत
पेड़ विराजत
काटे से मर जेहें
बहती नदियाँ
निर्मल रहती
रूकी थकी बेचेन
बादर मत बरसो
दिन रेन

कमलेश कुमार दीवान
4  मार्च 2015

Tuesday, March 3, 2015

नए लोग हैं


भारत मे लोकतंत्र है सत्ता प्रतिष्ठानो पर काबिज होते ही लोग नये जुमले गढ़ते है
नवीन विचार फेकते है नये प्रभाव उत्पन्न करने की कोशिश करते है जद्दोजहद मे शायद उनके प्रभाव से उत्पन्न होने वाली परेशानियो के बारे मे विचार नहीं कर पाते है यह कविता एक समझाईश भर है कृपया पढ़े ...

नए लोग है

नए लोग हैं
नव विचार तो देगें ही
चाहे फिर जितने सबाल हो।
नए लोग है ।
देश काल का ध्यान न आये
ऐसा भी क्यों
बहकी हुई हवा भरमाये
ऐसा ही क्यों
नये बोध है
नये शोध है
नये लोभ है
नई पौध है
शिष्टाचार निबाहगें ही
चाहे फिर सबसे बँचित हो
नये लोग है ।
नव विचार तो देगें ही
चाहे फिर जितने सबाल हों।

 कितना मुश्किल लोकतंत्र है
पाँच वरष ढेरो प्रपँच है
थोड़ा सहन करो  तब देखो
सुख सुविधाये अनंत है
नये दौर है
नव करार तो होगे ही
चाहे फिर
जितने मलाल हो ।
नये लोग है
नव विचार तो देगें ही
चाहे फिर जितने सबाल हो ।

कमलेश कुमार दीवान
लेखक
दिनाँक..3मार्च 2015
mob.no.9425642458
email..kamleshkumardiwan@gmail.com