Sunday, April 10, 2016

॥लोकगीत॥ १ थोड़ा सा समझ के " लोकतंत्र "

॥लोकगीत॥ १
थोड़ा सा समझ के

थोड़ा सा समझ के
दबइयो बटन भैया
दबइयो बटन बहना
जा मे से.......
लोकतंत्र आयेगो ।
सबके मन भायेगो।
हम सबको निबाहेगो।

जाति पाँति धर्माधरम
बात करत बड़ी बड़ी
बाँटे है देश और
घात करत घड़ी घड़ी
जीत के जो
फूलो न समायेगो ।

थोड़ा सा समझ के,
दबइयो बटन भैया
सबके मन भायेगो।
ओ भैया ,ओ बहना,
जा मे से लोकतंत्र आयेगो ।

थोड़ा सा समझ के
दबइयो बटन भैया
दबइयो बटन बहना
जा मे से लोकतंत्र आयेगो
सबके मन भायेगो
हम सबको निबाहगो ।

कमलेश कुमार दीवान
१९ अप्रेल २००९ 

Thursday, April 7, 2016

"तो अच्छा होगा " ..मानव जीवन के संबंध मे एक गीत

जिन्दगी के बारे मे हम बहुत चिंतिंत रहते है सोचते है क्या होगा कैसे बीतेगी इस संदर्भ मे मेरा यह गीत प्रस्तुत है गुनगुनाये तो अच्छा लगेगा ....

तो अच्छा होगा  ..मानव जीवन के संबंध मे एक गीत

जिन्दगी ऐसी निकल जाये
तो अच्छा होगा ।
किसी से खुशियाँ मिले
और कोई दुआयें दे
जिन्दगी ऐसी सँभल जाये
तो अच्छा होगा ।

कभी दुख भी मिले
तो हसरते भी पूरी हो
दिल के अरमान
संजोने भी तो जरूरी हो
भीगे कोरे मेरी आँखो की
तुम्हारी नम हो
निकल आये अगर आँसू
तब तुम्हारे गम हो

खुशनुमा भोर हो
दोपहरी हो
साँझ भी ऐसी ही ढल जाये
तो अच्छा होगा
जिन्दगी ऐसी ही बन जाये
तो अच्छा होगा ।
कमलेश कुमार दीवान
22/3/2016
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