💐💐यार किससे कहे💐💐
I am writer,poet and retired principle higher secondary government school for more than 33 years. Published articles in news paper through Sarvodaya press service, Indore .Naiduniya Jansatta ,and others.my poems got published in Samkaleen Bhartiya Saahitya NewDelhi,Uttaraardh,Akshat,Kala-kalash etc.
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शनिवार, 14 फ़रवरी 2026
यार किससे कहें.... ग़ज़ल
गुरुवार, 12 फ़रवरी 2026
दरिया -2
दरिया या नदी की हालातों पर हम अनेक तरह से अपनी बात कह सकते हैं अर्ज़ किया है कि....
*दरिया -2
कमलेश कुमार दीवान
अपनी ही रवानी से अनजान है दरिया
झरनो की मेहरबानी से पशेमान है दरिया
जाना था बहुत दूर समुंदर की तरफ ही
साहिल है निगहबानी से परेशान है दरिया
धारा भी थक गई है रूक रूक के बह रहा
थमने की इस कहानी से बेजान है दरिया
आया था पहाड़ों से बड़ी धार में लेकिन
फिर किसकी निगरानी से हैरान है दरिया
लहरें हवा से आज क्यों ऊंची उठे 'दीवान '
पानी तो निशानी भी तेरी पहचान हैं दरिया
कमलेश कुमार दीवान
19/3/25
#दरिया
@सर्वाधिकारसुरक्षित
सोमवार, 9 फ़रवरी 2026
दरिया.... ग़ज़ल
दरिया
कमलेश कुमार दीवान
यूं अपनी ही रवानी से अनजान है दरिया
इस उसकी मेहरबानी से पशेमान है दरिया
जाना था अभी उसको समुंदर की तरफ ही
घाटी की बेईमानी से बहुत परेशान है दरिया
कभी कम तो तेज अब थमा सा ही रह गया
अपनी ही इस कहानी से कुछ हैरान है दरिया
पहाड़ों से सरकते आ रहा एक सैलाब सा धीरे
अपनी ही निगहबानी से असमान हैं दरिया
लहरें हवा से आज भी क्यों उठ रही 'दीवान '
कुछ छोड़ निशानी से तेरी पहचान हैं दरिया
कमलेश कुमार दीवान
19/3/25