Saturday, November 7, 2009

कैसी बीत रही है (एक गीत )

कैसी बीत रही है

मै अचछा हूँ
आप बताये
कैसी बीत रही है ।

घर आँगन
सूना सूना है
खाली खाली दिन और रात ,
अपने है सब
रूठे रूठे
कही न कोई ऐसी बात,
मै बचता हूँ
आप बताये
कैसे जीत रही ।

क्या तुमने
माँ बाबा के बीच
सुलह करबाई है
बहन भाई के बीच
हुई क्यों
मार पिटाई है ,
क्या कक्षा में
डाँट पड़ी या
फिर मौसम की मार
क्या बस्तो के बोझ तले
हो रही पढाई है ।

मै अच्छा हूँ
आप बताये
कैसे सीख रहीं है
कैसे बीत रही है ।
कमलेश कुमार दीवान
१३ अगस्त २००९

8 comments:

  1. कैसी बीत रही है? सभी अच्‍छी कहते हैं, लेकिन दिल से पूछो कैसी बीत रही है? बहुत ही सशक्‍त रचना, बधाई। वर्ड वेरिफिकेशन हटा दें।

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  2. बढ़िया कहा आपने कैसी बीत रही है ...सच्चे भावों को दर्शाती सुन्दर रचना

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  3. मै अचछा हूँ
    आप बताये
    कैसी बीत रही है ।

    घर आँगन
    सूना सूना है
    खाली खाली दिन और रात ,
    अपने है सब
    रूठे रूठे
    कही न कोई ऐसी बात,
    मै बचता हूँ
    आप बताये
    कैसे जीत रही ।
    अच्छा गीत । सारे मित्रों के हालचाल लेता हुआ आज आपके ब्लाग में आया । अच्छा लगा।

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