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शुक्रवार, 28 मई 2021

"हम आसमां से कहे" ....गजल

           " ह्म आसमां से कहे "

                                कमलेश कुमार दीवान

हम आसमाँ से कहे ,अपनी बदल ले तस्वीर 

दो चार सूरज हों और चाँद हो दस॑ बीस

फलक पे तारे हों जो चल सके इशारों से 

जमी पे पेड़ हों तो सब ही हों पहाड़ो पर

कोई तो पासवाँ से कहे अपनी बदल ले तकरीर 

एक आध अपनी बात हो और किताब से दस बीस ।

हम आसमाँ से .......

हम हवाओं से कहे जब भी चले  धीरे वहें

रोक ले बादलो को  , जब कहे तब ही बरसें 

धरा से चाहे कि वो ही रहे सटकर हमसे

नदी को बाँध ले भरमाये न इनसे सागर 

आसमां हम ही हों तब सब ही बदल देंगें तकदीर 

एक आध अपने ठाँव हों खिताब हों दस बीस ।

हम आसमां से .......


कमलेश कुमार दीवान 

15/5/21 

सोमवार, 3 मई 2021

कुछ बाते .........एक गीत

                 "कुछ बाते "        

                               कमलेश कुमार दीवान 

कुछ बाते जो नई नई सी 

अच्छी लगती हैं

यादों के अथाह सागर मे 

डूब डूब जाता है जब मन

होती है बरसात बहुत और 

भीग भीग जाता है जब तन

फिर आती है जब कुछ राते 

छुई मुई सी कुछ सौगाते

नई नई सी सच्ची लगती है 

कुछ बाते .......

कुछ बाते जो बहुत पुरानी 

कही कही अनकही शेष हैं 

वो भी एक कहानी सी हैं 

यादें रची‌‌‌- बसी बचपन की

लगती अब गुड़ ‌‌‌‌- धानी सी है 

भर भर जाता है जब मन 

फिर भाती अच्छी सी बातें

कई कई तो कच्ची सी लगती हैं

कुछ बाते जो नई नई सी 

अच्छी लगती हैं 

कुछ सौगातें जो नई नई सी 

सच्ची लगती हैं 

कमलेश कुमार दीवान 

30/8/20