तुम जो मिलते हो .... नज़्म
कमलेश कुमार दीवान
तुम जो मिलते हो ख्यालों में धूप आती है
यूं पास रहते तो हवाएं भी चुप लगाती है
गुनगुनाने लगे इस झील का पानी ऐसे
जैसे नदियां ज्यों पहाड़ों से उतर आती है
रंग फूलों का भी खिल के निखर आता है
बाग में खुशबू का हर रंग नज़र आता है
मुस्कुराते पात डालियां भी लहलहाती हैं
उड़ती फिरती हुई चिड़ियाएं चहचहाती है
अब बहुत दूर हुए पास भी आएं तो क्या
बस तेरी याद ही होले से धप्प जमाती है
तुम जो मिलते हो ख्यालों में धूप आती है
यूं पास रहते तो हवाएं भी चुप लगाती है
कमलेश कुमार दीवान
22/4/26
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