💐💐यार किससे कहे💐💐
कमलेश कुमार दीवान
हर एक रंग होता है प्यार ,यार किससे कहें
सभी तो होते हैं तलबगार ,यार किससे कहें
बहारें देख, खिलते हैं मन,और गुल गुलिस्तां मे
सभी होते हैं,बागों मे शुमार ,यार किससे कहें
ये तितलियां वो भंवरे यूं तो नहीं आते हैं यहाँ
स्वाद है रस भी है बेशुमार, यार किससे कहें
वो खुशबू को उड़ाते है यूं बार बार इन हवाओं मे
जिबह भी हो दिलो मे खुमार, यार किससे कहे
ये तमाशा भी बैठकर यहां देखता है "दीवान"
रगो मे ,रंग मे, रंग की बयार, यार किससे कहे
कमलेश कुमार दीवान
14/2/26
आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में रविवार 15 फरवरी, 2026 को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर
जवाब देंहटाएंवाह
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर अभिव्यक्ति।
जवाब देंहटाएंसादर।